एंजियोप्लास्टी की पारंपरिक तकनीक में stent डालना आम है, लेकिन अब एक नई, मेटल-फ्री विकल्प उपलब्ध है: स्टेंटलेस एंजियोप्लास्टी या ड्रग-कोटेड बलून (DCB) विधि — जिसे अक्सर “लिव नथिंग बिहाइंग” कहा जाता है। इस तरीके में धमनियों के अंदर कोई स्थायी धातु नहीं छोड़ी जाती। इसका उद्देश्य ब्लॉकेज को ठीक करना है जबकि भविष्य में स्टेंट से जुड़े जटिलताओं को कम करना है।
स्टेंटलेस एंजियोप्लास्टी में सबसे पहले एक साधारण बैलून के माध्यम से ब्लॉकेज को फैलाया या तोड़ा जाता है। उसके बाद वही बैलून या एक अलग बैलून जो ऊपर से दवा से कोटेड होता है, उसे प्रभावित क्षेत्र पर कुछ समय के लिए लगाए रखते हैं ताकि दवा सीधे रक्त वाहिनी की दीवार में प्रवेश कर सके। यह दवा सूजन और कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि को रोकती है, जिससे पुनः रुकावट (रेस्टेनोसिस) के जोखिम को कम किया जा सके।
ड्रग-कोटेड बलून पर एनी-प्रोलिफेरेटिव दवा रहती है, जो कोशिकात्मक वृद्धि को रोकती है। क्लिनिकल प्रैक्टिस में पॅक्लिटॅक्सल जैसी दवाओं का उपयोग आम होता है ताकि दवा शिरा की दीवार में प्रवेश करके पुनररुद्धि को रोके।
इस तकनीक के कई नैदानिक लाभ हैं, जिनकी वजह से कुछ मामलों में यह पारंपरिक स्टेंटिंग से बेहतर विकल्प बन सकती है:
स्टेंटलेस एंजियोप्लास्टी हर रोगी के लिए नहीं होती। यह विशेष रूप से उन मरीजों के लिए उपयोगी है जिनमें:
कई लाभों के बावजूद, सीमाएँ और जोखिम हैं जिन पर ध्यान देना जरूरी है:
प्रोसीज़र के बाद मरीज की दवा और निगरानी व्यक्तिगत रोगनिदान पर निर्भर करेगी। कई الحالات में एंटीप्लेटलेट थेरेपी की अवधि कम की जा सकती है, पर यह पूरी तरह रोगी की जोखिम-आधारित रणनीति पर निर्भर करता है। नियमित कार्डियोलॉजिकल फॉलो-अप और आवश्यक इमेजिंग जांचें सुझाई जा सकती हैं ताकि पुनःरुद्धि या अन्य जटिलताओं की तत्काल पहचान हो सके।
स्टेंटलेस एंजियोप्लास्टी एक उभरती हुई, उपयोगी तकनीक है जो कई मरीजों में “लीव नथिंग बिहाइंग” के सिद्धांत पर काम करती है। यह उन रोगियों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद हो सकती है जिनमें मेटल छोड़ना समस्याग्रस्त हो, या जहाँ लंबे समय तक रक्त पतला करने वाली दवाओं से जोखिम अधिक हो।
फैसला हमेशा व्यक्तिगत स्थिति, धमनियों के आकार और प्रकृति, रोगी के जोखिम प्रोफाइल और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट की क्लिनिकल जजमेन्ट पर आधारित होना चाहिए। सही मरीज चुनने पर यह तकनीक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प साबित हो सकती है।